Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.207.45-46: हे भरतश्रेष्ठ! त्रेता से वे बढ़ने लगे। तदनन्तर जब त्रेता और द्वापर की भयंकर संध्याएँ आईं, तब राजा लोग आपस में होड़ करने लगे और युद्ध करने लगे ॥45-46॥ | mahabharat अध्याय 12.207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रेताप्रभृति वर्धन्ते ते जना भरतर्षभ॥ ४५॥
ततस्तस्मिन् महाघोरे संध्याकाल उपस्थिते।
राजान: समसज्जन्त समासाद्येतरेतरम्॥ ४६॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! त्रेता से वे बढ़ने लगे। तदनन्तर जब त्रेता और द्वापर की भयंकर संध्याएँ आईं, तब राजा लोग आपस में होड़ करने लगे और युद्ध करने लगे ॥45-46॥
Bharatshrestha! From Treta they started increasing. Subsequently, when the terrible evening hours of Treta and Dwapara arrived, the kings started competing with each other and engaged in war. 45-46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥