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mahabharat 12.207.44-45h: हे मनुष्यों के स्वामी! इन सबके आचरण और विचार चाण्डाल, कौवे और गिद्धों के समान हैं। सत्ययुग में ये इस पृथ्वी पर विचरण नहीं करते। 44 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  12.207.44-45h 
श्वपाकबलगृध्राणां सधर्माणो नराधिप॥ ४४॥
नैते कृतयुगे तात चरन्ति पृथिवीमिमाम्।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! इन सबके आचरण और विचार चाण्डाल, कौवे और गिद्धों के समान हैं। सत्ययुग में ये इस पृथ्वी पर विचरण नहीं करते। 44 1/2
 
O Lord of men! All of them have the same behaviour and thoughts as Chandalas, crows and vultures. They do not roam on this earth in Satya Yuga. 44 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)