श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.207.32 
बाहुभ्यां क्षत्रियशतं वैश्यानामूरुत: शतम्।
पद्भॺां शूद्रशतं चैव केशवो भरतर्षभ॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! इस केशव ने अपनी दोनों भुजाओं से सैकड़ों क्षत्रियों को, अपनी जंघाओं से सैकड़ों वैश्यों को और अपने दोनों पैरों से सैकड़ों शूद्रों को उत्पन्न किया।
 
O best of the Bharatas! This Keshava created hundreds of Kshatriyas with his two arms, hundreds of Vaishyas with his thighs and hundreds of Shudras with his two feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)