श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.207.3 
भीष्म उवाच
श्रुतोऽयमर्थो रामस्य जामदग्न्यस्य जल्पत:।
नारदस्य च देवर्षे: कृष्णद्वैपायनस्य च॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी ने कहा-युधिष्ठिर! इस विषय की चर्चा मैंने जमदग्निनन्दन परशुराम, देवर्षि नारद तथा श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासजी के मुख से सुनी है। 3॥
 
Bhishmaji said – Yudhishthir! I have heard the discussion of this subject from the mouth of Jamadagninandan Parshuram, Devarshi Narad and Shri Krishnadvaipayan Vyasji. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)