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mahabharat 12.207.18: हे प्रिय! इन छहों पुत्रों में मरीचि सबसे बड़े थे। उन्होंने अपने मन से ब्रह्मज्ञानियों में श्रेष्ठ, अत्यन्त तेजस्वी, कश्यप नामक पुत्र को जन्म दिया॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.207.18 
मरीचि: कश्यपं तात पुत्रमग्रजमग्रज:।
मानसं जनयामास तैजसं ब्रह्मवित्तमम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिय! इन छहों पुत्रों में मरीचि सबसे बड़े थे। उन्होंने अपने मन से ब्रह्मज्ञानियों में श्रेष्ठ, अत्यन्त तेजस्वी, कश्यप नामक पुत्र को जन्म दिया॥18॥
 
O dear! Marichi was the eldest among these six sons. By his own mind he gave birth to a son named Kashyap, the best among the knowers of Brahman, who is very brilliant.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)