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mahabharat 12.207.1-2: युधिष्ठिर बोले - भरतश्रेष्ठ! महाज्ञानी पितामह! कमलनयन भगवान श्रीकृष्ण ही अपनी महिमा से कभी ओझल नहीं होते, सबके रचयिता, सनातन परिपूर्ण, सर्वव्यापी और समस्त प्राणियों की उत्पत्ति और संहार के स्थान हैं। वे कभी किसी से पराजित नहीं होते। वे नारायण, हृषिकेश, गोविन्द और केशव नामों से भी प्रसिद्ध हैं। मैं उनके स्वरूप का दार्शनिक वर्णन सुनना चाहता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  12.207.1-2 
युधिष्ठिर उवाच
पितामह महाप्राज्ञ पुण्डरीकाक्षमच्युतम्।
कर्तारमकृतं विष्णुं भूतानां प्रभवाप्ययम्॥ १॥
नारायणं हृषीकेशं गोविन्दमपराजितम्।
तत्त्वेन भरतश्रेष्ठ श्रोतुमिच्छामि केशवम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - भरतश्रेष्ठ! महाज्ञानी पितामह! कमलनयन भगवान श्रीकृष्ण ही अपनी महिमा से कभी ओझल नहीं होते, सबके रचयिता, सनातन परिपूर्ण, सर्वव्यापी और समस्त प्राणियों की उत्पत्ति और संहार के स्थान हैं। वे कभी किसी से पराजित नहीं होते। वे नारायण, हृषिकेश, गोविन्द और केशव नामों से भी प्रसिद्ध हैं। मैं उनके स्वरूप का दार्शनिक वर्णन सुनना चाहता हूँ।
 
Yudhishthir said – Bharatshreshtha! Great wise grandfather! Lotus-eyed Lord Shri Krishna is the one who never fades away from His glory, the creator of all, eternally perfect, omnipresent and the place of origin and destruction of all beings. They are never defeated by anyone. He is also famous by the names Narayan, Hrishikesh, Govind and Keshav. I want to hear the philosophical explanation of their nature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)