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mahabharat 12.206.6: पहले मनुष्य को वस्तु का ज्ञान होता है; फिर उसके मन में उसे प्राप्त करने की इच्छा उत्पन्न होती है। तत्पश्चात् वह उस कार्य को करने का संकल्प करता है और प्रयत्न करने लगता है। तब कार्य पूर्ण होता है और उसका फल प्राप्त होता है।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.206.6 
ज्ञानपूर्वा भवेल्लिप्सा लिप्सापूर्वाभिसंधिता।
अभिसंधिपूर्वकं कर्म कर्ममूलं तत: फलम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
पहले मनुष्य को वस्तु का ज्ञान होता है; फिर उसके मन में उसे प्राप्त करने की इच्छा उत्पन्न होती है। तत्पश्चात् वह उस कार्य को करने का संकल्प करता है और प्रयत्न करने लगता है। तब कार्य पूर्ण होता है और उसका फल प्राप्त होता है।॥6॥
 
First a person gets knowledge of the object; then a desire to acquire it arises in his mind. After that he resolves to accomplish this task and starts making efforts. Then the work is completed and its fruits are obtained.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)