Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.206.31: जैसे सम्पूर्ण जगत् का प्रकाशक सूर्य प्रकाश गुण प्राप्त करके अपनी किरणों को समेटकर सूर्यास्त के समय निर्गुण हो जाता है, वैसे ही विवेकरहित मुनि यहाँ अविनाशी निर्गुण ब्रह्म में प्रवेश करता है ॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दिवाकरो गुणमुपलभ्य निर्गुणो
यथा भवेदपगतरश्मिमण्डल:।
तथा ह्यसौ मुनिरिह निर्विशेषवान्
स निर्गुणं प्रविशति ब्रह्म चाव्ययम्॥ ३१॥
अनुवाद
जैसे सम्पूर्ण जगत् का प्रकाशक सूर्य प्रकाश गुण प्राप्त करके अपनी किरणों को समेटकर सूर्यास्त के समय निर्गुण हो जाता है, वैसे ही विवेकरहित मुनि यहाँ अविनाशी निर्गुण ब्रह्म में प्रवेश करता है ॥31॥
Just as the Sun, the illuminator of the entire world, after attaining the quality of light, gathers its rays and becomes nirgun while going to the sunset, in the same way, the sage who is free from discrimination enters here into the imperishable Nirgun Brahma. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥