Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.206.27: जब साधक साधनों के गुणों को अपनाकर उन सांसारिक वस्तुओं से मन को हटा लेता है, तब उसका मन बुद्धि द्वारा उत्पन्न शुभ-अशुभ विचारों से रहित होकर सर्वदा शुद्ध रहता है। जब साधन में लगा हुआ साधक गुणों से परे चला जाता है, तब उसे ब्रह्म के वास्तविक स्वरूप का साक्षात्कार हो जाता है॥27॥ | mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गुणादाने विप्रयोगे च तेषां
मन: सदा बुद्धिपरावराभ्याम्।
अनेनैव विधिना सम्प्रवृत्तो
गुणापाये ब्रह्म शरीरमेति॥ २७॥
अनुवाद
जब साधक साधनों के गुणों को अपनाकर उन सांसारिक वस्तुओं से मन को हटा लेता है, तब उसका मन बुद्धि द्वारा उत्पन्न शुभ-अशुभ विचारों से रहित होकर सर्वदा शुद्ध रहता है। जब साधन में लगा हुआ साधक गुणों से परे चला जाता है, तब उसे ब्रह्म के वास्तविक स्वरूप का साक्षात्कार हो जाता है॥27॥
When a seeker adopts the virtues of the means and withdraws his mind from those worldly things, then his mind remains pure all the time, devoid of the good and bad thoughts generated by the intellect. When a seeker engaged in the means goes beyond the virtues, then he realizes the true nature of Brahma.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥