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mahabharat 12.206.25: अतः ज्ञान द्वारा बुद्धि को, बुद्धि द्वारा मन को तथा मन द्वारा इन्द्रियों को शुद्ध एवं पवित्र करके अविनाशी परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है।   |   mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.206.25 
ज्ञानेन निर्मलीकृत्य बुद्धिं बुद्धॺा मनस्तथा।
मनसा चेन्द्रियग्राममक्षरं प्रतिपद्यते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अतः ज्ञान द्वारा बुद्धि को, बुद्धि द्वारा मन को तथा मन द्वारा इन्द्रियों को शुद्ध एवं पवित्र करके अविनाशी परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है।
 
Therefore, by purifying and purifying the intellect through knowledge, the mind through intellect and the senses through the mind, the indestructible God can be attained.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)