Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.206.24: ध्यान द्वारा शुद्ध और परिष्कृत किए हुए मन से हम भगवान के स्वरूप का अनुभव तो कर सकते हैं, परंतु शब्दों से उसका वर्णन नहीं कर सकते, क्योंकि मन के द्वारा ही मानसिक विषयों को ग्रहण किया जा सकता है और ज्ञान के द्वारा ही ज्ञेय को जाना जा सकता है॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सूक्ष्मेण मनसा विद्मो वाचा वक्तुं न शक्नुम:।
मनो हि मनसा ग्राह्यं दर्शनेन च दर्शनम्॥ २४॥
अनुवाद
ध्यान द्वारा शुद्ध और परिष्कृत किए हुए मन से हम भगवान के स्वरूप का अनुभव तो कर सकते हैं, परंतु शब्दों से उसका वर्णन नहीं कर सकते, क्योंकि मन के द्वारा ही मानसिक विषयों को ग्रहण किया जा सकता है और ज्ञान के द्वारा ही ज्ञेय को जाना जा सकता है॥ 24॥
We can experience the form of God with our mind purified and refined by meditation, but we cannot describe it with words because mental objects can be grasped only by the mind and the knowable can be known only by knowledge.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥