Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.206.21: मनुष्य को भौतिक वस्तुओं में आसक्ति होती है, क्योंकि इन्द्रिय सुख नित्य हैं; यह उनकी भावना है और वे अपने मन में सांसारिक वस्तुओं को पाने की इच्छा रखते हैं; इसीलिए वे परम ब्रह्म परमात्मा को प्राप्त नहीं कर पाते। | mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विषयेषु च संसर्गाच्छाश्वतस्य च दर्शनात्।
मनसा चान्यदाकांक्षन् परं न प्रतिपद्यते॥ २१॥
अनुवाद
मनुष्य को भौतिक वस्तुओं में आसक्ति होती है, क्योंकि इन्द्रिय सुख नित्य हैं; यह उनकी भावना है और वे अपने मन में सांसारिक वस्तुओं को पाने की इच्छा रखते हैं; इसीलिए वे परम ब्रह्म परमात्मा को प्राप्त नहीं कर पाते।
Human beings have attachment to material things because sensual pleasures are everlasting; this is their feeling and they desire to acquire worldly things in their mind; that is why they do not attain the Supreme Brahma, the Supreme Soul.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥