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ऋचामादिस्तथा साम्नां यजुषामादिरुच्यते।
अन्तश्चादिमतां दृष्टो न त्वादिर्ब्रह्मण: स्मृत:॥ १८॥
अनुवाद
इसे ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद का आरंभ कहा गया है। जिन चीज़ों का आरंभ होता है, उनका अंत भी होता देखा गया है। ब्रह्म का कोई आरंभ नहीं है।
That is called the beginning of Rig Veda, Yajur Veda and Sama Veda. Things which have a beginning have been seen to come to an end. Brahma has no beginning.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥