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mahabharat 12.206.15: ये मारण जीव के गुणों में अर्थात् गुणों के कार्यरूप, शरीर आदि के सम्बन्ध में व्यक्त हो रहे हैं; परन्तु ईश्वर निर्गुण होने के कारण इनसे परे है। जो धर्म निवृत्ति (निष्काम कर्म) रूप है, वही शाश्वत पद (मोक्ष) को प्राप्त कराने में समर्थ है। 15॥   |   mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.206.15 
गुणेष्वेते प्रकाशन्ते निर्गुणत्वात् तत: परम्।
निवृत्तिलक्षणो धर्मस्तथाऽऽनन्त्याय कल्पते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ये मारण जीव के गुणों में अर्थात् गुणों के कार्यरूप, शरीर आदि के सम्बन्ध में व्यक्त हो रहे हैं; परन्तु ईश्वर निर्गुण होने के कारण इनसे परे है। जो धर्म निवृत्ति (निष्काम कर्म) रूप है, वही शाश्वत पद (मोक्ष) को प्राप्त कराने में समर्थ है। 15॥
 
These killings are being expressed in the qualities of the living being, that is, in relation to the working form of the qualities, body etc.; But because God is without qualities, he is beyond them. The religion which is of the form of nivrutti (selfless action) is capable of attaining the eternal state (moksha). 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)