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mahabharat 12.206.14: अविनाशी विष्णु को ही परम ब्रह्म कहा गया है। वे ही परम धाम और परम पद हैं। उन्हें प्राप्त करके जीव काल के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.206.14 
तद् ब्रह्म परमं प्रोक्तं तद्धाम परमं पदम्।
तद् गत्वा कालविषयाद् विमुक्ता मोक्षमाश्रिता:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अविनाशी विष्णु को ही परम ब्रह्म कहा गया है। वे ही परम धाम और परम पद हैं। उन्हें प्राप्त करके जीव काल के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करते हैं।
 
The indestructible Vishnu is called the Supreme Brahman. He is the supreme abode and the supreme state. On attaining him, the living beings are freed from the rule of time and attain salvation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)