Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.206.1: मनु कहते हैं - बृहस्पति! जब मनुष्य अपनी पाँचों इन्द्रियों और मन को, तथा शब्द आदि पाँचों इन्द्रिय-विषयों को वश में कर लेता है, तब वह उस परम ब्रह्म को जान लेता है जो रत्नों से आवृत सूत के समान सर्वव्यापी है।॥1॥ | mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनु कहते हैं - बृहस्पति! जब मनुष्य अपनी पाँचों इन्द्रियों और मन को, तथा शब्द आदि पाँचों इन्द्रिय-विषयों को वश में कर लेता है, तब वह उस परम ब्रह्म को जान लेता है जो रत्नों से आवृत सूत के समान सर्वव्यापी है।॥1॥
Manu says - Brihaspati! When a man controls his five senses and mind along with the five sense-objects like sound, then he realizes the Supreme Brahma who is omnipresent like a thread covered with gems. ॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥