Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.205.26: धर्म करने से सौभाग्य बढ़ता है और अधर्म करने से कल्याण की हानि होती है। सांसारिक भोगों में आसक्त पुरुष प्रकृति को प्राप्त होता है और सांसारिक भोगों से विरक्त पुरुष आत्मज्ञान प्राप्त कर मुक्त हो जाता है॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 12.205: परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्म करने से सौभाग्य बढ़ता है और अधर्म करने से कल्याण की हानि होती है। सांसारिक भोगों में आसक्त पुरुष प्रकृति को प्राप्त होता है और सांसारिक भोगों से विरक्त पुरुष आत्मज्ञान प्राप्त कर मुक्त हो जाता है॥ 26॥
By doing Dharma, one's good fortune increases and by doing Adharma, one's welfare is harmed. A person who is attached to worldly pleasures attains Prakriti and a person who is detached from worldly pleasures attains self-knowledge and becomes free.॥ 26॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि मनुबृहस्पतिसंवादे पञ्चाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २०५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें मनु और बृहस्पतिका संवादविषयक दो सौ पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥