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mahabharat 12.205.2: दुःख से छुटकारा पाने की सबसे अच्छी औषधि है उसके बारे में सोचना बंद कर देना; क्योंकि उसके बारे में सोचने से वह प्रकट होता है और बढ़ता रहता है ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.205: परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 205: परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.205.2 
भैषज्यमेतद् दु:खस्य यदेतन्नानुचिन्तयेत्।
चिन्त्यमानं हि चाभ्येति भूयश्चापि प्रवर्तते॥ २॥
 
 
अनुवाद
दुःख से छुटकारा पाने की सबसे अच्छी औषधि है उसके बारे में सोचना बंद कर देना; क्योंकि उसके बारे में सोचने से वह प्रकट होता है और बढ़ता रहता है ॥2॥
 
The best medicine to get rid of sorrow is to stop thinking about it; because thinking about it makes it appear and keep increasing. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)