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मनस्त्वपहृतं पूर्वमिन्द्रियार्थनिदर्शकम्।
न समक्षगुणापेक्षि निर्गुणस्य निदर्शकम्॥ १३॥
अनुवाद
परंतु जब इन्द्रियों के विषयों को दिखाने वाला मन पहले से ही विषयों की ओर आसक्त हो जाता है, तब विषयों के गुणों की अपेक्षा करने वाला मन निर्गुण तत्त्व को दिखाने में समर्थ नहीं होता ॥13॥
But when the mind that shows the objects of the senses is already hijacked towards the objects, then the mind that expects the qualities of the objects is not capable of showing the nirguna element. 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥