Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.204.8: पापों के नाश होने पर ही मनुष्य के हृदय में ज्ञान का उदय होता है, जैसे स्वच्छ दर्पण में ही मनुष्य अपना प्रतिबिम्ब स्पष्ट देख सकता है ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.204: आत्मा एवं परमात्माके साक्षात्कारका उपाय तथा महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 204: आत्मा एवं परमात्माके साक्षात्कारका उपाय तथा महत्त्व  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.204.8 
ज्ञानमुत्पद्यते पुंसां क्षयात् पापस्य कर्मण:।
यथाऽऽदर्शतले प्रख्ये पश्यत्यात्मानमात्मनि॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पापों के नाश होने पर ही मनुष्य के हृदय में ज्ञान का उदय होता है, जैसे स्वच्छ दर्पण में ही मनुष्य अपना प्रतिबिम्ब स्पष्ट देख सकता है ॥8॥
 
Knowledge emerges in the hearts of human beings only after the destruction of their sins. Just as a human being can see his reflection clearly only in a clean mirror. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)