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mahabharat 12.204.7: विषयों में आसक्त होकर, उनमें सदैव लीन रहकर तथा मन के द्वारा साधन के विपरीत सुखों की इच्छा करके मनुष्य परमेश्वर को प्राप्त नहीं कर पाता।   |   mahabharat अध्याय 12.204: आत्मा एवं परमात्माके साक्षात्कारका उपाय तथा महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 204: आत्मा एवं परमात्माके साक्षात्कारका उपाय तथा महत्त्व  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.204.7 
विषयेषु तु संसर्गाच्छाश्वतस्य तु संश्रयात्।
मनसा चान्यथा कांक्षन् परं न प्रतिपद्यते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
विषयों में आसक्त होकर, उनमें सदैव लीन रहकर तथा मन के द्वारा साधन के विपरीत सुखों की इच्छा करके मनुष्य परमेश्वर को प्राप्त नहीं कर पाता।
 
By getting attached to the objects, by always remaining absorbed in them and by desiring pleasures contrary to the means through the mind, man does not attain the Supreme God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)