इन्द्रियों के द्वारा मन को प्राप्त नहीं किया जा सकता, अर्थात् इन्द्रियाँ मन को नहीं जानतीं। मन बुद्धि को नहीं जानता और बुद्धि सूक्ष्म तथा अव्यक्त आत्मा को नहीं जानती; परन्तु अव्यक्त आत्मा इन सबको देखता और जानता है॥ 20॥
The mind cannot be achieved through the senses, i.e. the senses do not know the mind. The mind does not know the intellect and the intellect does not know the subtle and unmanifested soul; but the unmanifested soul sees and knows all of these.॥ 20॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि मनुबृहस्पतिसंवादे चतुरधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २०४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें मनु और बृहस्पतिका संवादविषयक दो सौ चारवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥