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mahabharat 12.204.18: परब्रह्म परमेश्वर स्पर्श, श्रोत, रस, रूप, गंध और यहाँ तक कि संकल्प के विकल्प से भी रहित है; इसलिए केवल शुद्ध बुद्धि ही उसमें प्रवेश कर सकती है ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.204: आत्मा एवं परमात्माके साक्षात्कारका उपाय तथा महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 204: आत्मा एवं परमात्माके साक्षात्कारका उपाय तथा महत्त्व  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.204.18 
अस्पर्शनमशृण्वानमनास्वादमदर्शनम्।
अघ्राणमवितर्कं च सत्त्वं प्रविशते परम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
परब्रह्म परमेश्वर स्पर्श, श्रोत, रस, रूप, गंध और यहाँ तक कि संकल्प के विकल्प से भी रहित है; इसलिए केवल शुद्ध बुद्धि ही उसमें प्रवेश कर सकती है ॥18॥
 
The Supreme God is devoid of touch, hearing, taste, sight, smell and even the choice of thoughts; That's why only pure intelligence can enter into it. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)