श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 204: आत्मा एवं परमात्माके साक्षात्कारका उपाय तथा महत्त्व  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.204.17 
बुद्धि: कर्मगुणैर्हीना यदा मनसि वर्तते।
तदा सम्पद्यते ब्रह्म तत्रैव प्रलयं गतम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब बुद्धि कर्मजनित गुणों से मुक्त होकर हृदय में स्थित हो जाती है, उस समय आत्मा ब्रह्म में लीन होकर ब्रह्म को प्राप्त हो जाती है ॥17॥
 
When the intellect becomes free from the qualities generated by karma and settles in the heart, at that time the soul gets absorbed in Brahma and attains Brahma. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)