Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.204.15: जो जीवात्मा प्रवृत्ति के आधार पर पुण्य और पाप कर्मों का आश्रय लेता है, वह कर्मों द्वारा बार-बार कर्म मार्ग में लाया जाता है, अर्थात् संसार चक्र में भटक जाता है, और सुख-दुःख के रूप में अपने कर्मों का फल भोगता है ॥15॥ | mahabharat अध्याय 12.204: आत्मा एवं परमात्माके साक्षात्कारका उपाय तथा महत्त्व । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो जीवात्मा प्रवृत्ति के आधार पर पुण्य और पाप कर्मों का आश्रय लेता है, वह कर्मों द्वारा बार-बार कर्म मार्ग में लाया जाता है, अर्थात् संसार चक्र में भटक जाता है, और सुख-दुःख के रूप में अपने कर्मों का फल भोगता है ॥15॥
The soul who has resorted to pious and sinful actions based on tendencies, is brought back to the path of action by the actions again and again, i.e. is misled in the cycle of the world, and receives the fruits of his actions in the form of happiness and sorrow. ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥