Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.203.8: जैसे चन्द्रमा पर जो कलंक है, वह जगत् अर्थात् पृथ्वी का प्रतीक है; परन्तु उसे देखकर भी मनुष्य यह नहीं समझता कि वह जगत् अर्थात् पृथ्वी का प्रतीक है। वैसे ही 'मैं हूँ' स्वरूप आत्मा का ज्ञान तो सबको है; परन्तु सच्चा ज्ञान नहीं है; इसी कारण मनुष्य उस पर आश्रित नहीं है॥8॥ | mahabharat अध्याय 12.203: शरीर, इन्द्रिय और मन-बुद्धिसे अतिरिक्त आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पश्यन्नपि यथा लक्ष्म जगत् सोमे न विन्दति।
एवमस्ति न चोत्पन्नं न च तन्न परायणम्॥ ८॥
अनुवाद
जैसे चन्द्रमा पर जो कलंक है, वह जगत् अर्थात् पृथ्वी का प्रतीक है; परन्तु उसे देखकर भी मनुष्य यह नहीं समझता कि वह जगत् अर्थात् पृथ्वी का प्रतीक है। वैसे ही 'मैं हूँ' स्वरूप आत्मा का ज्ञान तो सबको है; परन्तु सच्चा ज्ञान नहीं है; इसी कारण मनुष्य उस पर आश्रित नहीं है॥8॥
Just as the blemish on the moon is a symbol of the world i.e. the earth; but even after seeing it, man does not understand that it is a symbol of the world i.e. the earth. Similarly, everyone has knowledge of the soul in the form 'I am'; but does not have the true knowledge; due to this man is not dependent on it.॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥