Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.203.6-7: जैसे हिमालय का दूसरा भाग और चन्द्रमा का पृष्ठ भाग मनुष्यों ने नहीं देखा है, फिर भी इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि उनका पृष्ठ भाग और पृष्ठ भाग नहीं है। इसी प्रकार समस्त प्राणियों के भीतर स्थित अन्तर्यामी ज्ञानस्वरूप आत्मा भी अत्यंत सूक्ष्म होने के कारण आँखों से कभी नहीं देखा जा सका है; अतः इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि आत्मा नहीं है॥6-7॥ | mahabharat अध्याय 12.203: शरीर, इन्द्रिय और मन-बुद्धिसे अतिरिक्त आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा हिमवत: पार्श्वं पृष्ठं चन्द्रमसो यथा।
न दृष्टपूर्वं मनुजैर्न च तन्नास्ति तावता॥ ६॥
तद्वद् भूतेषु भूतात्मा सूक्ष्मो ज्ञानात्मवानसौ।
अदृष्टपूर्वश्चक्षुर्भ्यां न चासौ नास्ति तावता॥ ७॥
अनुवाद
जैसे हिमालय का दूसरा भाग और चन्द्रमा का पृष्ठ भाग मनुष्यों ने नहीं देखा है, फिर भी इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि उनका पृष्ठ भाग और पृष्ठ भाग नहीं है। इसी प्रकार समस्त प्राणियों के भीतर स्थित अन्तर्यामी ज्ञानस्वरूप आत्मा भी अत्यंत सूक्ष्म होने के कारण आँखों से कभी नहीं देखा जा सका है; अतः इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि आत्मा नहीं है॥6-7॥
Just as the other side of the Himalayas and the back side of the moon have not been seen by humans, yet on this basis it cannot be said that their sides and back side do not exist. Similarly, the inner knowledge-form soul residing within all beings has never been seen by the eyes due to being extremely subtle; hence it cannot be said on this basis that the soul does not exist.॥ 6-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥