श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 203: शरीर, इन्द्रिय और मन-बुद्धिसे अतिरिक्त आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.203.22 
यथा चन्द्रार्कनिर्मुक्त: स राहुर्नोपलभ्यते।
तद्वच्छरीरनिर्मुक्त: शरीरी नोपलभ्यते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जैसे चन्द्रमा के सूर्य से अलग होने पर सूर्य में राहु को प्राप्त नहीं किया जा सकता, वैसे ही शरीर से अलग होने पर शरीर में स्थित आत्मा को नहीं देखा जा सकता ॥22॥
 
Just as Rahu cannot be attained in the Sun when the Moon is separated from the Sun, similarly the soul in the body cannot be seen when it is separated from the body. ॥22॥
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