श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 203: शरीर, इन्द्रिय और मन-बुद्धिसे अतिरिक्त आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.203.17 
यथाऽऽकाशान्तरं प्राप्य चन्द्रमा भ्राजते पुन:।
तद्वल्लिङ्गान्तरं प्राप्य शरीरी भ्राजते पुन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जैसे चन्द्रमा आकाश में दूसरा स्थान पाकर पुनः चमकने लगता है, वैसे ही आत्मा भी दूसरा शरीर धारण करके पुनः प्रकट होती है ॥17॥
 
Just as the moon, after finding another place in the sky, begins to shine again, similarly the soul takes another body and appears again. ॥ 17॥
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