Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.202.20: आकाश में श्रवणेन्द्रिय है (और उसका विषय शब्द है), पृथ्वी में घ्राणेन्द्रिय है (और उसका विषय गंध है) और ये दोनों रूप और विपाक हैं (और चक्षुेन्द्रिय) - ये सब प्रकाशमान हैं। स्वेद और रस (और रसना) इन्द्रियाँ - ये जल पर आश्रित हैं। और स्पर्श और स्पर्श इन्द्रिय वायु का रूप है ॥20॥ | mahabharat अध्याय 12.202: आत्मतत्त्वका और बुद्धि आदि प्राकृत पदार्थोंका विवेचन तथा उसके साक्षात्कारका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आकाश में श्रवणेन्द्रिय है (और उसका विषय शब्द है), पृथ्वी में घ्राणेन्द्रिय है (और उसका विषय गंध है) और ये दोनों रूप और विपाक हैं (और चक्षुेन्द्रिय) - ये सब प्रकाशमान हैं। स्वेद और रस (और रसना) इन्द्रियाँ - ये जल पर आश्रित हैं। और स्पर्श और स्पर्श इन्द्रिय वायु का रूप है ॥20॥
The sky has the sense of hearing (and its object is word), the earth has the sense of smell (and its object is smell) and both of them are Rupa and Vipak (and the eye-sense) – all of them are luminous. Sweat and Rasa (and Rasna-) senses – these are dependent on water. And the sense of touch and touch is the form of air. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥