Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.202.2: इन पूर्वोक्त शरीरों के साथ (पृथ्वी शरीर के पश्चात) जीव जल में लय होते हैं; फिर जल से अग्नि में, अग्नि से वायु में और वायु से आकाश में लीन हो जाते हैं। आकाश से सृष्टिकाल में वे पुनः पूर्वोक्त क्रम से जन्म लेते हैं; किन्तु जो ज्ञानी हैं, वे मोक्षस्वरूप भगवान को प्राप्त होते हैं। वे इस संसार में पुनः जन्म नहीं लेते। 2॥ | mahabharat अध्याय 12.202: आत्मतत्त्वका और बुद्धि आदि प्राकृत पदार्थोंका विवेचन तथा उसके साक्षात्कारका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतै: शरीरैर्जलमेव गत्वा
जलाच्च तेज: पवनोऽन्तरिक्षम्।
खाद् वै निवर्तन्ति न भाविनस्ते
मोक्षं च ते वै परमाप्नुवन्ति॥ २॥
अनुवाद
इन पूर्वोक्त शरीरों के साथ (पृथ्वी शरीर के पश्चात) जीव जल में लय होते हैं; फिर जल से अग्नि में, अग्नि से वायु में और वायु से आकाश में लीन हो जाते हैं। आकाश से सृष्टिकाल में वे पुनः पूर्वोक्त क्रम से जन्म लेते हैं; किन्तु जो ज्ञानी हैं, वे मोक्षस्वरूप भगवान को प्राप्त होते हैं। वे इस संसार में पुनः जन्म नहीं लेते। 2॥
Along with these aforesaid bodies (after the terrestrial body) the living beings have rhythm in the water; Then they merge from water into fire, from fire into air and from air into sky. During the time of creation from the sky, they are again born in the above order; But those who are knowledgeable attain God as the form of salvation. They are not born again in this world. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥