Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.202.11: जैसे अग्नि की ज्वालाएँ, वायु का वेग, सूर्य की किरणें और नदियों का बहता हुआ जल, ये सब आते-जाते रहते हैं, वैसे ही देहधारी प्राणियों के शरीर भी आने-जाने के प्रवाह में रहते हैं ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.202: आत्मतत्त्वका और बुद्धि आदि प्राकृत पदार्थोंका विवेचन तथा उसके साक्षात्कारका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे अग्नि की ज्वालाएँ, वायु का वेग, सूर्य की किरणें और नदियों का बहता हुआ जल, ये सब आते-जाते रहते हैं, वैसे ही देहधारी प्राणियों के शरीर भी आने-जाने के प्रवाह में रहते हैं ॥11॥
Just as the flames of a fire, the force of the wind, the rays of the sun and the flowing water of rivers all come and go, so too the bodies of embodied beings are in the flow of coming and going. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥