Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.202.10: जैसे राजा द्वारा भिन्न-भिन्न कार्यों के लिए नियुक्त अनेक मंत्री राजा को अपने-अपने कार्यों की जानकारी देते हैं, वैसे ही शरीर में स्थित पाँचों ज्ञानेन्द्रियाँ राजबुद्धि को अपने-अपने विषयों की जानकारी देती हैं। जैसे राजा मंत्रियों से श्रेष्ठ है, वैसे ही उन्हें संचालित करने वाला ज्ञान उन पाँचों ज्ञानेन्द्रियों से श्रेष्ठ है।॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.202: आत्मतत्त्वका और बुद्धि आदि प्राकृत पदार्थोंका विवेचन तथा उसके साक्षात्कारका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा च राज्ञा बहवो ह्यमात्या:
पृथक् प्रमाणं प्रवदन्ति युक्ता:।
तद्वच्छरीरेषु भवन्ति पञ्च
ज्ञानैकदेश: परम: स तेभ्य:॥ १०॥
अनुवाद
जैसे राजा द्वारा भिन्न-भिन्न कार्यों के लिए नियुक्त अनेक मंत्री राजा को अपने-अपने कार्यों की जानकारी देते हैं, वैसे ही शरीर में स्थित पाँचों ज्ञानेन्द्रियाँ राजबुद्धि को अपने-अपने विषयों की जानकारी देती हैं। जैसे राजा मंत्रियों से श्रेष्ठ है, वैसे ही उन्हें संचालित करने वाला ज्ञान उन पाँचों ज्ञानेन्द्रियों से श्रेष्ठ है।॥10॥
Just as many ministers appointed by a king for different tasks inform the king about their different tasks, similarly the five sense organs present in the body give information about their respective subjects to the royal intellect. Just as the king is superior to the ministers, similarly the knowledge that drives them is superior to those five sense organs.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥