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mahabharat 12.201.3: एक समय देवताओं और ऋषियों की सभा में प्रधान ऋषि बृहस्पति ने समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ मनु को शिष्यरूप में प्रणाम करके यह प्राचीन प्रश्न पूछा -॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.201: बृहस्पतिके प्रश्नके उत्तरमें मनुद्वारा कामनाओंके त्यागकी एवं ज्ञानकी प्रशंसा तथा परमात्मतत्त्वका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 201: बृहस्पतिके प्रश्नके उत्तरमें मनुद्वारा कामनाओंके त्यागकी एवं ज्ञानकी प्रशंसा तथा परमात्मतत्त्वका निरूपण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.201.3 
प्रजापतिं श्रेष्ठतमं प्रजानां
देवर्षिसंघप्रवरो महर्षि:।
बृहस्पति: प्रश्नमिमं पुराणं
पप्रच्छ शिष्योऽथ गुरुं प्रणम्य॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक समय देवताओं और ऋषियों की सभा में प्रधान ऋषि बृहस्पति ने समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ मनु को शिष्यरूप में प्रणाम करके यह प्राचीन प्रश्न पूछा -॥3॥
 
Once upon a time, in the assembly of gods and sages, the chief sage Brihaspati, bowing to Manu, the best of all creatures, as a disciple, asked this ancient question -॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)