Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.201.26: वह अनिर्वचनीय वस्तु नाना प्रकार के स्वादों और नाना प्रकार की गंधों से रहित है। वह शब्द, स्पर्श और रूप से भी रहित है। मन, बुद्धि और वाणी से भी उसका अनुभव नहीं किया जा सकता। वह अव्यक्त, अद्वितीय और रूप-रंग से रहित है, फिर भी उसी ने जीवों के लिए रूप, रस आदि पाँच विषयों की रचना की है॥26॥ | mahabharat अध्याय 12.201: बृहस्पतिके प्रश्नके उत्तरमें मनुद्वारा कामनाओंके त्यागकी एवं ज्ञानकी प्रशंसा तथा परमात्मतत्त्वका निरूपण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह अनिर्वचनीय वस्तु नाना प्रकार के स्वादों और नाना प्रकार की गंधों से रहित है। वह शब्द, स्पर्श और रूप से भी रहित है। मन, बुद्धि और वाणी से भी उसका अनुभव नहीं किया जा सकता। वह अव्यक्त, अद्वितीय और रूप-रंग से रहित है, फिर भी उसी ने जीवों के लिए रूप, रस आदि पाँच विषयों की रचना की है॥26॥
That indescribable thing is devoid of various kinds of tastes and different kinds of smells. It is also devoid of sound, touch and form. It cannot be perceived even by the mind, intellect and speech. It is unmanifested, unique and devoid of form and colour, yet it is He who has created the five subjects like form, taste etc. for the living beings.॥26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥