Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.201.23: जो मनुष्य कर्मों के फल की इच्छा करता है, वह कर्मों के फल में आसक्त होकर सात्त्विक, राजसिक या तामसिक कर्म करता है; उस कर्म के गुणों से प्रेरित होकर उसे उस कर्म का अच्छा या बुरा फल भोगना पड़ता है ॥23॥ | mahabharat अध्याय 12.201: बृहस्पतिके प्रश्नके उत्तरमें मनुद्वारा कामनाओंके त्यागकी एवं ज्ञानकी प्रशंसा तथा परमात्मतत्त्वका निरूपण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य कर्मों के फल की इच्छा करता है, वह कर्मों के फल में आसक्त होकर सात्त्विक, राजसिक या तामसिक कर्म करता है; उस कर्म के गुणों से प्रेरित होकर उसे उस कर्म का अच्छा या बुरा फल भोगना पड़ता है ॥23॥
A man who desires the fruits of his actions, being attached to the fruits of his actions, performs actions of a Sattvik, Rajasic or Tamasic nature; being inspired by the qualities of that action, he has to suffer the good or bad results of that action. ॥23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥