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युधिष्ठिर उवाच
किं फलं ज्ञानयोगस्य वेदानां नियमस्य च।
भूतात्मा च कथं ज्ञेयस्तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह ! ज्ञानयोग, वेद और वैदिक नियमों (अग्निहोत्र आदि) का क्या फल है ? सब प्राणियों के भीतर निवास करने वाले ईश्वर का ज्ञान कैसे हो सकता है ? यह मुझे बताइए ॥1॥
Yudhishthir asked – Grandfather! What is the result of Gyan Yoga, Vedas and Vedic rules (Agnihotra etc.)? How can there be knowledge of God who resides within all living beings? Tell me this. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥