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श्लोक  12.200.6 
वरश्च मम पूर्वं हि दत्तो देव्या महाबल।
श्रद्धा ते जपतो नित्यं भवत्विति विशाम्पते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे पराक्रमी प्रजानाथ! देवी सावित्री ने मुझे आशीर्वाद दिया है कि जप में आपकी भक्ति सदैव बनी रहेगी।॥6॥
 
'O mighty Prajanath! Goddess Savitri has blessed me that your devotion in chanting will remain constant.'॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)