Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.200.5: हे राजन! इस फल से युक्त होकर आप उत्तम गति को प्राप्त हों और आपकी अनुमति लेकर मैं पुनः जप में लग जाऊँगा॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.200.5 
फलेनानेन संयुक्तो राजर्षे गच्छ मुख्यताम्।
भवता चाभ्यनुज्ञातो जपेयं भूय एव ह॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इस फल से युक्त होकर आप उत्तम गति को प्राप्त हों और आपकी अनुमति लेकर मैं पुनः जप में लग जाऊँगा॥5॥
 
'O King! By being united with this fruit you may attain the best state and after taking your permission I shall once again engage myself in Japa.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)