Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.200.34: महाराज! मैंने जो कुछ सुना था, उसके अनुसार मैंने मन्त्र जपने वालों के उत्तम फल और गति का वर्णन किया है। अब आप और क्या सुनना चाहते हैं?॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाराज! मैंने जो कुछ सुना था, उसके अनुसार मैंने मन्त्र जपने वालों के उत्तम फल और गति का वर्णन किया है। अब आप और क्या सुनना चाहते हैं?॥ 34॥
Maharaj! I have described the excellent fruits and destination of those who chant mantras as per what I had heard. What else do you want to hear?॥ 34॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि जापकोपाख्याने द्विशततमोऽध्याय:॥ २००॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें जापकका उपाख्यानविषयक दो सौवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २००॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥