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mahabharat 12.200.33: राजन! तब वे सब लोग धर्म को आदरपूर्वक प्रस्तुत करके प्रसन्न मन से महात्मा के पीछे चले॥33॥   |   mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.200.33 
ते च सर्वे महात्मानो धर्मं सत्कृत्य तत्र वै।
पृष्ठतोऽनुययू राजन् सर्वे सुप्रीतचेतस:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
राजन! तब वे सब लोग धर्म को आदरपूर्वक प्रस्तुत करके प्रसन्न मन से महात्मा के पीछे चले॥33॥
 
Rajan! Then all of them followed Mahatma with a happy mind after presenting the religion respectfully. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)