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mahabharat 12.200.32: भीष्मजी कहते हैं - हे राजन! ऐसा कहकर ब्रह्माजी वहाँ से अन्तर्धान हो गए। उनकी आज्ञा पाकर देवता भी अपने-अपने स्थान को चले गए।   |   mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.200.32 
भीष्म उवाच
इत्युक्त्वा स तदा देवस्तत्रैवान्तरधीयत।
आमन्त्र्य च ततो देवा ययु: स्वं स्वं निवेशनम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - हे राजन! ऐसा कहकर ब्रह्माजी वहाँ से अन्तर्धान हो गए। उनकी आज्ञा पाकर देवता भी अपने-अपने स्थान को चले गए।
 
Bhishmaji says - O King! After saying this, Brahmaji disappeared from there. After taking his orders, even the gods went to their respective places.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)