Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.200.3-4: भीष्मजी बोले - प्रभु ! तब 'बहुत अच्छा' कहकर ब्राह्मण ने धर्म, यम, काल, मृत्यु और स्वर्ग - इन सब पूज्य देवताओं की पूजा की। वहाँ पहले से उपस्थित समस्त ब्राह्मणों तथा वहाँ आए हुए अन्य श्रेष्ठ ब्राह्मणों के चरणों में ब्राह्मण ने सिर नवाया और उन सबका विधिपूर्वक पूजन करके ब्राह्मण ने राजा से कहा - ॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
तथेत्येवं प्रतिश्रुत्य धर्मं सम्पूज्य च प्रभो।
यमं कालं च मृत्युं च स्वर्गं सम्पूज्य चार्हत:॥ ३॥
पूर्वं ये चापरे तत्र समेता ब्राह्मणर्षभा:।
सर्वान् सम्पूज्य शिरसा राजानं सोऽब्रवीद् द्विज:॥ ४॥
अनुवाद
भीष्मजी बोले - प्रभु ! तब 'बहुत अच्छा' कहकर ब्राह्मण ने धर्म, यम, काल, मृत्यु और स्वर्ग - इन सब पूज्य देवताओं की पूजा की। वहाँ पहले से उपस्थित समस्त ब्राह्मणों तथा वहाँ आए हुए अन्य श्रेष्ठ ब्राह्मणों के चरणों में ब्राह्मण ने सिर नवाया और उन सबका विधिपूर्वक पूजन करके ब्राह्मण ने राजा से कहा - ॥3-4॥
Bhishmaji said - Prabhu! Then saying 'very good' the Brahmin worshipped all the revered gods - Dharma, Yama, Kaal, Mrityu and Swarga. The Brahmin bowed his head at the feet of all the Brahmins who were already present there and also the other great Brahmins who had come there and after worshipping them all properly the Brahmin said to the king -॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥