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mahabharat 12.200.23: ब्रह्माजी ने उस तेजस्वी पुरुष का स्वागत करके पुनः मधुर वाणी में उससे कहा - 'हे ब्राह्मण! जो फल योगी को मिलता है, वही फल निःसंदेह मन्त्र जपने वाले को भी प्राप्त होता है॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.200.23 
भूयश्चैवापरं प्राह वचनं मधुरं तदा।
जापकैस्तुल्यफलता योगानां नात्र संशय:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने उस तेजस्वी पुरुष का स्वागत करके पुनः मधुर वाणी में उससे कहा - 'हे ब्राह्मण! जो फल योगी को मिलता है, वही फल निःसंदेह मन्त्र जपने वाले को भी प्राप्त होता है॥ 23॥
 
After welcoming that radiant person, Brahma once again spoke to him in a sweet voice - 'O Brahmin! Whatever result a yogi gets, the same result is undoubtedly received by those who chant mantras as well.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)