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mahabharat 12.200.21-22: तब सम्पूर्ण दिशाओं में महान कोलाहल मच गया। सब लोग उस ज्योति की स्तुति करने लगे। प्रजानाथ! वह तेजोमय ज्योति भूमि के समान लम्बे पुरुष का रूप धारण करके ब्रह्माजी के पास पहुँची, तब ब्रह्माजी ने आगे बढ़कर उसका स्वागत किया। 21-22।   |   mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.200.21-22 
हाहाकारस्तथा दिक्षु सर्वेषां सुमहानभूत्।
तज्ज्योति: स्तूयमानं स्म ब्रह्माणं प्राविशत् तदा॥ २१॥
तत: स्वागतमित्याह तत् तेज: प्रपितामह:।
प्रादेशमात्रं पुरुषं प्रत्युद्‍गम्य विशाम्पते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तब सम्पूर्ण दिशाओं में महान कोलाहल मच गया। सब लोग उस ज्योति की स्तुति करने लगे। प्रजानाथ! वह तेजोमय ज्योति भूमि के समान लम्बे पुरुष का रूप धारण करके ब्रह्माजी के पास पहुँची, तब ब्रह्माजी ने आगे बढ़कर उसका स्वागत किया। 21-22।
 
Then there was a great uproar in all directions. Everyone started praising that light. Prajanath! That bright light, taking the shape of a man as tall as the land, reached Brahmaji, then Brahmaji went forward and welcomed it. 21-22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)