Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.200.2: और आपने जो तीन प्रकार की मुक्ति बताई है, अर्थात् तात्कालिक मुक्ति, क्रमिक मुक्ति और परलोक प्राप्ति, उनमें से उन दोनों को कौन सी मुक्ति प्राप्त हुई? उस समय उनमें क्या वार्तालाप हुआ और उन्होंने क्या किया?॥2॥ | mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथवा तौ गतौ तत्र यदेतत् कीर्तितं त्वया।
संवादो वा तयो: कोऽभूत् किं वा तौ तत्र चक्रतु:॥ २॥
अनुवाद
और आपने जो तीन प्रकार की मुक्ति बताई है, अर्थात् तात्कालिक मुक्ति, क्रमिक मुक्ति और परलोक प्राप्ति, उनमें से उन दोनों को कौन सी मुक्ति प्राप्त हुई? उस समय उनमें क्या वार्तालाप हुआ और उन्होंने क्या किया?॥2॥
And out of the three types of salvation that you have described, namely immediate salvation, gradual salvation and attainment of another world, which salvation did those two attain? What conversation took place between them at that time and what did they do?॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥