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mahabharat 12.200.19: इस प्रकार मन को जीतकर और दृष्टि को एकाग्र करके उन दोनों ने प्राणों सहित सुषुम्ना मार्ग से मन को मूढ़ता में स्थित कर दिया। फिर वे दोनों समाधि में स्थित हो गए। उस समय उन दोनों के शरीर जड़ वस्तुओं के समान निश्चल हो गए। 19॥   |   mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.200.19 
निश्चेष्टाभ्यां शरीराभ्यां स्थिरदृष्टी समाहितौ।
जितात्मानौ तथाऽऽधाय मूर्धन्यात्मानमेव च॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मन को जीतकर और दृष्टि को एकाग्र करके उन दोनों ने प्राणों सहित सुषुम्ना मार्ग से मन को मूढ़ता में स्थित कर दिया। फिर वे दोनों समाधि में स्थित हो गए। उस समय उन दोनों के शरीर जड़ वस्तुओं के समान निश्चल हो गए। 19॥
 
In this way, after conquering the mind and concentrating the vision, both of them, along with their life, established the mind in foolishness through the path of Sushumna. Then both of them became situated in samadhi. At that time both of their bodies became motionless like inanimate objects. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)