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mahabharat 12.200.14: वहाँ उन महात्माओं पर दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी। अप्सराओं के समूह सर्वत्र नृत्य करने लगे॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.200.14 
पुष्पवर्षाणि दिव्यानि तत्र तेषां महात्मनाम्।
ननृतुश्चाप्सर: संघास्तत्र तत्र समन्तत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उन महात्माओं पर दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी। अप्सराओं के समूह सर्वत्र नृत्य करने लगे॥14॥
 
There a shower of divine flowers began upon those great souls. Herds of Apsaras began dancing everywhere.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)