| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 20: मुनिवर देवस्थानका राजा युधिष्ठिरको यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 12.20.9  | अनर्हते यद् ददाति न ददाति यदर्हते।
अर्हानर्हापरिज्ञानाद् दानधर्मोऽपि दुष्कर:॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘अक्सर मनुष्य अपात्र को धन दे देता है, और सुपात्र को नहीं देता। चूँकि सुपात्र और अपात्र की पहचान नहीं हो पाती, (यह भ्रूणहत्या के समान पाप है, इसलिए) दान भी कठिन होता है।॥9॥ | | | | ‘Often a person gives money to an ineligible person and does not give it to the deserving person. Since one is unable to identify the deserving and the ineligible, (it is a sin similar to foeticide, hence) charity is also difficult.॥ 9॥ | | ✨ ai-generated | | |
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