श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 20: मुनिवर देवस्थानका राजा युधिष्ठिरको यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.20.8 
कृच्छ्राच्च द्रव्यसंहारं कुर्वन्ति धनकारणात्।
धनेन तृषितोऽबुद्धॺा भ्रूणहत्यां न बुद्धॺते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
लोग धन के लिए बड़ी कठिनाई से नाना प्रकार की भौतिक वस्तुएँ एकत्रित करते हैं। परन्तु धन का प्यासा मनुष्य यह नहीं समझता कि अज्ञानतावश वह भ्रूण-हत्या के समान पाप का भागी बनता है॥8॥
 
‘People collect various kinds of material things with great difficulty for wealth. But a person thirsting for wealth does not understand that due to ignorance he becomes a part of sin like killing an embryo.॥ 8॥
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